शनिवार, 27 नवंबर 2010

माँ

 माँ जब
 तुम नहीं होती हो तो ये ग़रसुना सा लगता है मे HI नहीं    दीवारे भी तुमे याद करती है रसोई तो सुनी SI लगती  है गर तो मानो काटने को दोड़ता है  तुमारे बिना यएः  VERAAN  होता है  एक पल भी जब तुम कही जाती हो तो ये ग़र और दीवारे तुमारी आने की राहे देखती है जब तुम नहीं होती हो तो ग़र ग़र नहीं लगता हर पल बोजिल सा लगता है ..................... माँ मे एक पल भी तिमसे दूर नहीं रे सकता .....................................................................    तेरा बेटा                                          हनी शर्मा 

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