मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

अश्क

आज शाम डलते डलते कोई ४ बजे होगे और आज  आसमान की आँखों मै भी नशा  नजर आ रहा है
   जेसे पूरी रात सोया न हो आँखे भारी सी है 
कुछ अश्क की बुँदे  इशक के धरातल पर टपकने को आतुर सी नज़र आती है 
आकाश की छवि धरातल के अक्ष से आज बड़ी धुंधली सी नज़र आ रही है
 जेसे कोई पुरानी तस्वीर याद आ रही हो उसके साथ गुजरा ज़माना याद आ रहा हो  आँखों  के 
सामने सब दुन्ध्ला सा है लगता है  आसमा के आशु   निकल आयेंगे इतनी बड़ी गहरी आखो मै 
कब तक तेर पायेंगे  दूर पाहडी  पर तहरा आकश एसा नज़र आता है जेसे अभी रो देगा 
न जाने क्यों आज आकश इतना प्यारा और दर्द का सागर लगता है दिल मै तड़प उठती है की इसे बाहों मै 
ले कर जी भर कर रो ले आसमा के  के साथ अपने अश्क  खो दे    

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

आज फिर वसंत लौट आया है


 आज फिर वसंत लौट आया है तेज हवा चुभती धुप के साथ
पेड़ो से पते पक कर गिरने लगे है आम पीपल नीम पलाश गुलमोहर  
से गिरते पतों को देखकर कहता हु की काश...........................
   जो दुखो का सैलाब मुजशे जुड़ा है वो भी अब तो पक चूका है.
काश ये दर्द का सैलाब भी इन सूखे पतों की तरह  मेरे जिस्म ऐ (रूह)
का साथ छोड़ दे.                       ........................................................................................................................................................     सुहानी लगती है वसंत की चांदनी  राते हलके
होकर चमकते पेड़ सुख के सागर मै गोत्ते लगाते ये पेड़ बड़े सुन्धर मालूम होते है
चमकते पेड़ इन चांदनी रातो मै जानत का नज़ारा देते है  जेसे श्री कृष्ण ने यही राश रचा हो 
 चांदनी रात मै बांशुरी बजाई हो  हो समधुर सुर है सारा का सारा वातावरण जेसे ख़ुशी  के
 फाग मै रंगा हो  सबने अपने दुखो को त्याग कर जिस्म ऐ रूह को हल्का कर लिया  काश वसंत की चांदनी रात मै गिरते पतों की तरहे मेरा भी दर्द सदा  सदा की लिए कृष्ण की सुमधुर बांशुरी  मै खो जाये  गिरते पतों मै ये दर्द भी गिर जाए 


शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

love latter

i love you  you are god for me avey breath i rember u again and again  plz naver let go
मेरी  sajni ......                                                                                                                                            इस बसंत मै न जाने क्यों बार बार दिल से एक अव्वाज उठती है की हर लम्हा तेरे   आगोश मै गुजार दू                  एक चांदनी रात  तेरे साथ बाते करते गुजार दू                                                                                                 हर लम्हा तेरे सजदे मै गुज्जरने की चाहत रकता  हु        तेरी खुबसूरत बेलोरी सिषे  से  आँखों मै  खुद का उजल्ला सा चेअर दखने की चाहत  बेहताशा बढती जा रही है हर रात चाँद को देखकर कुछ  गुनगुनाता रहता हु      पर अचानक से रुक जाता  हु  जब तुम मुजशे नाराज होती हो तो लगता है    ये रात मुझे काटने को आयेगी  चाँद से भी नफ़रत होती है ये    तो तेरी मोहबत  है जोचाँद  को देखने पर मजबूर  कर देती है   , जान  तुमारे साथ इतने रिश्तो को आयाम दे चूका हु  की उनके टूटने के दर से हे सिहर जाता हु  कल रात सपने मै तुमै नाराज होते देखा था और तुम मुझे छोड़ कर किसी महल की और चली जा रही हो   मेरी हर अव्वाज को नकारते   हुए   इस  एक पल के सपने  ने आँखों की सारी नीद उदा  daali  आज जान तुम मुजशे नाराज भी हो न जाने क्यों डर  है  कई तुम मुझे    अकेला छोड़ कर न चली जाओ तुमै खोने का डर मौत के डर से भी जायदा हो गया है लिखते लिखते मेरे हाथ भी कापने लगे है  ये लिखे हुए सबध तुम पढ़ पाओगे या नहीं वेसे भी तो तुमे मेरी (हस्त लेकन .)   बड़ी बेकार लगती है और तुमारा फरमान था की रोज कुछ पेज  नक़ल रोज किया करू  उसे करता  भी हु  पर कभी कभी                                                                                                                                                    तुमे ये बाते मेरे दिल की आवारगी  लगे  पर ये हकीकत का तराना  है

सोमवार, 28 मार्च 2011

गुलाम अली साहब की एक कीमती गजल

 गुलाम अली साहब की  एक  कीमती  गजल आपकी महफ़िल मे  पेश hai .........बहुत  प्यारी और  उम्दा गजल Yeh Dil Ye Pagal Ye dil Mera   ,,,,      

ye dil ye paagal dil mera
ye dil ye paagal dil mera
Kyon bujh gaya awaargi
ye dil ye paagal dil mera
Kyon bujh gaya awaargi

is dast mein ek shahr tha(2)
wo kya hua awaargi
ye dil ye paagal dil mera

Kal shab mujhe be-shakl ki awaaz ne chaunka diya
mein ne kaha tu kaun hai(2)
usne kaha awaargi
is dasht mein ek shahr tha(2)
wo kya hua awaargi
ye dil ye paagal dil mera

Ye dard ki tanhaiyaan(2)
ye dasht ka veeran safar
hum log to ukta gaye(2)
apni suna awaargi
is dasht mein ek shahr tha(2)
wo kya hua awaargi
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ye dil ye paagal dil mera

Ek ajnabi jhonke ne jab poochha mere ghum ka sabab(2)
sehra ki bheegi reth par(2)
maine likha awaargi
is dasht mein ek shahr tha(2)
wo kya hua awaargi
ye dil ye paagal dil mera

Kal raat tanha chaand ko dekha tha maine khwaab mein(2)
mohsin mujhe raas ayegi(2)
shayed sada awaargi
ye dil ye paagal dil mera
Kyon bujh gaya awaargi
is dasht mein ek shahr tha
wo kya hua awaargi

ye dil ye paagal dil mera
Kyon bujh gaya awaargi